Tuesday, 25 October 2016

                      वास्तु टिप्स दीवाली पर सजाये ऐसे अपना घर

दीवाली हिन्दु पर्व का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जैसे दीवाली का महीना पास आने लगता है लोग अपने-अपने  घरो को साफ करने मे लग जाते है.. यही नही बाजार से नई नी तस्वरी और सजाने का सामान लेकर घर को सजाने लगते है।
लेकिन कई बार घर को ज्यादा सुंदर बनाने के चक्कर में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं कि वास्तु के विपरीत स्थितियां बन जाती हैं इसलिए घर को सजाते समय वास्तु का ध्यान भी जरूर रखें।आज मै आपको बताऊंगी दीवाली पर घर को सजाने के लिये वास्तु टिप्स
पहला टिप्स- दीपावली के मौके पर बहुत से लोग टीवी और फ्रीज की खरीदारी करते हैं। टीवी और फ्रीज को उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुख करके लगाएं। ड्राइंग रूम में भारी समानों को दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार से सटाकर रखें।
दूसरा टिप्स- जिन लोगों के घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा की ओर है उन्हें मुख्य द्वार पर पिरामिड या लक्ष्मी गणेश की तस्वीर लगानी चाहिए। आपके घर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर है तो उत्तर पू्र्व दिशा को विशेष रूप से सजाएं।
तीसरा टिप्स- जल के भीतर नमक मिलाएं एवं पूरे घर में अंदर इसका छिड़काव करें। इस तरह की मान्यता है कि नमक वायु से नकारात्मकता को सोख लेते है एवं घर के भीतर एक सकारात्मक वातावरण सृजित करता है।
चौथा टिप्स-  आप घर के लिये कोई पेंटिग या की तस्वीर खरीद समय ध्यान रखे कि पेटिंग डूबते हुये जहाज, युद्- लडाई या उदास महौल की ना हो , उगते हुये सूरज की, मुस्कुराते हुये चेहरो की , फूलो की आदि आप पेंटिग ले सकते है और ये आप अपने घर की पूर्व दिशा मे लगा सकते है।
पांचवा टिप्स यदि घर में ओम, स्वस्तिक या अन्य कोई शुभ चिह्न वाली पेंटिंग लगानी हो तो, उत्तर-पूर्व कमरे की पूर्व दीवार इसके लिए उपयुक्त मानी गई है।
छठा टिप्स- कई लोग दीवाली के दिनों मे नई घड़ी लेकर आते है पर वास्तु ज्ञान ना होने के कारण उसे गलत दिशा मे लगा देते है।घड़ी लगाने के लिए उत्तर, पूर्व तथा पश्चिम दिशा को उत्तम माना जाता है। इनमें से किसी एक दिशा में घड़ी लगाने से घर में शुभ समय आता है।
Raashi Ke Tips



         लक्ष्मी जी का फोटो खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें,
           You must know about laxmi photo when buying


दीपावली की रात यानि की महालक्ष्मी जी के पूजन की रात और साथ ही लक्ष्मी जी को मनाने का सबसे अच्छा समय ..दिवाली का पर्व माता लक्ष्मी की आराधना का पर्व है इस दिन माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए हम सब विधि विधान से उनकी पूजा अर्चना करते हैं पर माता को प्रसन्न करने के लिए केवल विधि विधान से पूजा ही काफी नहीं बल्कि माता की जिस चित्र कि आप पूजा कर रहे हैं उनमें कुछ वस्तुओं का होना भी आवश्यक होता है तभी माता प्रसन्न होंगी और आपके घर में सुख समृद्धि का वास होगा आज मै आपको बताऊंगी की लक्ष्मी जी का फोटो खरीदते समय किन बात का ध्यान रखना चाहिये।
# माता लक्ष्मी का चित्र खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि माता कमल के पुष्प पर विराजित हूं

#
जिस चित्र में माता के पैर दिखते हो वह चित्र ना खरीदे अन्यथा घर में लक्ष्मी का वास लंबे समय तक नहीं होता बैठी लक्ष्मी का चित्र श्रेष्ठ होता है

#
चित्र में यदि माता के दोनों ओर हाथी विराजित हो और धन की वर्षा कर रहे हो तो उस चित्र से पूजा करने से घर में धन की कमी नहीं होती इसी तरह यदि सूंड में कलश लिए हुए हाथी हो तो शुभ माना जाता है 

#
मां लक्ष्मी के साथ भगवान नारायण का पूजन भी शुभ माना जाता है ऐसा कहा जाता है माता लक्ष्मी बिना विष्णु जी के घर नहीं आतीं इसीलिए विष्णु जी की पूजा कर आप माता लक्ष्मी को घर बुला सकते हैं

#
ऐसी मान्यता है कि अकेली लक्ष्मी मां के चित्र का पूजन करने की अपेक्षा गणेश व सरस्वती के साथ उनका पूजन कल्याणकारी होता है इस तरह धन विद्या व सुविधा की प्राप्ति होती है 

#
लक्ष्मी जी का वह चित्र जिसमें वह दोनों हाथों से धन बरसा रही हो धन प्राप्ति के लिए बहुत शुभ होता है इसी तरह यदि चित्र में माता लक्ष्मी मुस्कुरा रही है तो आप सदा उनसे आशीर्वाद एवं धन प्राप्त करेंगे 

#
जब भी मां लक्ष्मी का पूजन विष्णु जी एवं गणेश जी के साथ करें तो हमेशा गणेश जी लक्ष्मी जी के दाहीने और एवं विष्णु जी लक्ष्मी जी के बाएं और होने चाहिए इसी प्रकार सही तरीके से पूजन करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति होती है
Raashi Ke Tips
                            दीवाली पर करे ये उपाय 


दीपावली की रात महानिशा मानी जाती है। दिवाली की रात पर किए गए टोने-टोटके, तंत्र-मंत्र प्रयोग अपनी पूरी शक्ति से काम करते हैं। इसीलिए इस दिन तंत्र प्रयोग करने का विशेष महत्व बताया गया है।आप भी इस दिन कुछ अत्यन्त ही सरल, साधारण लेकिन बेहद शक्तिशाली दीवाली के टोने टोटकों का प्रयोग कर अपनी इच्छाएं पूर्ण कर सकते हैं।
1.दीपावली के दिन में पांच पीपल के पत्तों को तोड़कर घर ले आएं। रात में माता महालक्ष्मी का पूजन करने के बाद उन पत्तों पर पनीर या दूध से बना कोई भी मिष्ठान रख कर उसे पीपल के पेड़ को अर्पित करें तथा अपनी इच्छा कहें। आपका कार्य अवश्य पूरा होगा।
2.यदि आपकी ऑफिस में या व्यापार में किसी कारण से तरक्की नहीं हो रही है। अथवा साथ वालों के कारण आपका प्रमोशन नहीं हो पा रहा है तो दीपावली की रात को कच्चा सूत लेकर उसे शुद्ध केसर से रंग लें तथा भाई दूज पर मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए अपने व्यापारिक स्थल में बांध दें। निश्चित ही आपके व्यापार में तरक्की होगी। जो लोग नौकरी करते हैं वे इसे अपनी टेबिल, अलमारी अथवा कम्प्यूटर के बांध दें। आपका भाग्य तुरंत चमक उठेगा।
3.अपने घर के आसपास किसी पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय दीपावली की रात में किया जाना चाहिए। ध्यान रखें दीपक लगाकर चुपचाप अपने घर लौट आए, वापिस पलटकर न देखें।
4. लक्ष्मी पूजन के समय एक नारियल लें और उस पर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि अर्पित करें और उसे भी पूजा में रखें।
5.इस दिन अमावस्या रहती है और इस तिथि पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने पर शनि के दोष और कालसर्प दोष समाप्त हो जाते हैं।
6. दीपावली की रात में लक्ष्मी पूजन के साथ ही अपनी दुकान, कम्प्यूटर आदि ऐसी चीजों की भी पूजा करें, जो आपकी कमाई का साधन हैं।
7. दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा करते समय एक थोड़ा बड़ा घी का दीपक जलाएं, जिसमें नौ बत्तियां लगाई जा सके। सभी 9 बत्तियां जलाएं और लक्ष्मी पूजा करें।

8. दीपावली पर लक्ष्मी का पूजन करने के लिए स्थिर लग्न श्रेष्ठ माना जाता है। इस लग्न में पूजा करने पर महालक्ष्मी स्थाई रूप से घर में निवास करती हैं।-पूजा में लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र और श्रीयंत्र रखना चाहिए।
 Raashi ke Tips

Monday, 17 October 2016

                                                        करवा चौथ की व्रत कथा

बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी। शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है। सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो। इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है। वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता । वह बौखला जाती है। उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है। सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। 
 उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है। इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह कर वह चली जाती है। सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।
अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है।

हे श्री गणेश- मां गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।

अधिकतर महिलायें अपने धर्म और रिति-रिवाज के अनुसार ही पूजा-विधि करती है।
Raashi ke Tips

Saturday, 15 October 2016

.Fअक्षर के लोगो का स्वभाव चमत्कारी समाधान

नाम के पहले अक्षर से राशि मालूम होती है और उस राशि के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कई जानकारी प्राप्त की जा सकती है। आज मै आपको बताऊंगी नाम के पहले अक्षर से व्यक्ति का स्वभाव।
बात करेंगे इंग्लिश अक्षर F  कि यदि किसी लड़की या लड़के का नाम अंग्रेजी के Fअक्षर से शुरु होता है तो ये लोग रिश्तों को बड़ा महत्व देते है। जानते है न जातकों के बाकी गुण..
स्वभाव--यदि किसी व्यक्ति के नाम का पहला अक्षर इंग्लिश के एफ से शुरू होता है तो वे लोग अपने घर-परिवार से पूरी तरह अटैच रहते हैं। इनके लिए परिवार ही पहली प्राथमिकता होता है और
सदस्यों के लिए कुछ भी कर सकने का जुनून भी होता है। समाज एवं परिवार की बुराईयों को दूर करना इनका मुख्य उद्देश्य होता है।
करियर- इनमें नेतृत्व शक्ति की प्रमुखता होती है। ऐसे जातक रहस्यवादी, जटिल व्यक्तित्व के धनी होते हैं। इनके जीवन में इतने अधिक परिवर्तन होते हैं कि कौनसी घटना कब घट जाएगी, इसका आभास नहीं होता है।
प्यार- प्यार के मामले मे लोग थोड़े से अड़ियल होते है, कभी तो क दम बड़ो के जैसे व्यवहार करते है तो कभी बच्चों के सामान व्यवहार करके सामने वाले को सोच मे डाल देते है। अपने प्यार से उम्मीदे ज्यादा करते है पुरी ना होने पर निराश हो जाते है। पर इनकी एक गुण खास होता है कि जिस भी रिश्ते मे जाते है बंध कर रहते है। ये काफी आकर्षक और रोमांटिंक होते हैं।
गुण-1. जिन जातकों का नाम एफअक्षर से शुरू होता है वह सच्चे, ईमानदार, उदार तथा परोपकारी होते हैं। इन्हें दूसरों की सेवा करना अच्छा लगता है। यह अपनी हर जिम्मेदारी सुचारू रूप से पूर्ण व्यवस्था के साथ निभाते हैं।
2. ऐसे जातक घरेलू कार्यों में अधिक रुचि लेते हैं। परिवार को सुचारु रूप से केसे चलाया जा सकता है, कोई इनसे सीखे। इनका जीवन एक तरह से समाज और परिवार की धरोहर होता है। ये, ईमानदार, मधुर व्यवहारी एवं परोपकारी होते हैं।
3. जीवन के प्रति इनका दृष्टिकोण भौतिकवादी होता है। ये अपने भाग्य पर ज्यादा विश्वास नहीं रखते। इनकी प्रतिभा अंतर्मुखी होती है। सच के साथ रहना इन्हें पसंद होता है। ऐसे लोग बहुत अधिक बोलेंगे या एकदम चुप्पी साधे हुए अतिगंभीर स्वभाव वाले होंगे। इनके गुस्से का सामना अच्छेअच्छे हिम्मत वाले व्यक्ति भी नहीं कर पाते।
4. इन लोगों में बाहरी प्रेम प्रदर्शन की आदत नहीं होती, इस कारण बहुत से लोग इन्हें कठोर समझते हैं, परन्तु वास्तव में ये ऐसे होते नहीं हैं।

 Raashi Ke Tips
Eअक्षर के लोगो का स्वभाव चमत्कारी समाधान

नाम के पहले अक्षर से राशि मालूम होती है और उस राशि के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कई जानकारी प्राप्त की जा सकती है। आज मै आपको बताऊंगी नाम के पहले अक्षर से व्यक्ति का स्वभाव।
बात करेंगे इंग्लिश अक्षर E कि यदि किसी लड़की या लड़के का नाम अंग्रेजी के E अक्षर से शुरु होता है तो ये लोग रिश्तों को बड़ा महत्व देते है। जानते है न जातकों के बाकी गुण..
स्वभाव-जिन जातकों का नाम अक्षर से शुरू होता है वह मौलिक विचारों वाले, अपनी छवि अलग बनाने वाले, अपने लक्ष्य के प्रति निरन्तर क्रियाशील रहने वाले होते हैं।
इन्हें भीड़ से हटकर काम करना अच्छा लगता है भले ही काम कितना भी जोखिम पूर्ण हो। नईनई योजना बनाना तथा योजनाबद्ध तरीके से काम करना इन्हें खूब आता है। यह स्पष्ट वक्ता, निडर और साहसी होते हैं तथा सच्ची और खरी बात कहने में पीछे नहीं हटते।
करियर- कार्यों में सफलता पाने के लिए पूरी मेहनत करते हैं और जब तक सफल नहीं हो जाते, इन्हें शांति नहीं मिलती है। इन लोगों की काम करने की क्षमता गजब की होती है, शारीरिक रूप से भी ये लोग शक्तिशाली होते हैं। इनकी सहनशक्ति भी बहुत अधिक होती है। काम को अंत तक ले जाते है और अपने कार्य़ क्षेत्र मे अपनी अलगी ही छवि बनाते है।
प्यार- प्यार के मामले मे ये जातक थोड़े से अनलकी होते है। और रिश्तो मे धोखा खाते है।
अक्सर दिल लगा तो बैठते है पर प्यार को पाने मे असफल रहते है।
गुण-1. ये बहिर्मुखी होते हैं। व्यवहारकुशलता की इनमें कमी होती है। किस समय, किस को क्या बोलना है इसका ध्यान न रखकर मुंह पर ही खरीखोटी कह देते हैं। । कार्य हो, विचार हो या योजनाएँ हो, हर क्षेत्र में नवीनता इन्हें प्रिय होती है।
2. ये जातक हमेशा कुछ नया पाना करना चाहते है पुराने नियम कानुन इन्हे बिल्कुल भी पंसद नही होते अपने नियम खुद बनाते है। दीमाग मे हमेशा कुछ ना कुछ चलता रहता है। घूमना फिरना इन्हे बहुत पंसद होता है।
3.वे लोग खुले विचारों वाले और बिंदास होते हैं, ये लोग सच बोलने में कभी भी हिचकते नहीं हैं और ना ही इस बात की परवाह करते हैं कि सच बोलने पर दूसरों को कितना कष्ट सहन करना पड़ सकता है। इनकी योजनाएं बहुत ही रचनात्मक होती हैं और इन योजनाओं पर ये लोग आसानी से काम भी कर लेते हैं।
 Raashi Ke Tips
Dअक्षर के लोगो का स्वभाव चमत्कारी समाधान

नाम के पहले अक्षर से राशि मालूम होती है और उस राशि के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कई जानकारी प्राप्त की जा सकती है। आज मै आपको बताऊंगी नाम के पहले अक्षर से व्यक्ति का स्वभाव।
बात करेंगे इंग्लिश अक्षर बी कि यदि किसी लड़की या लड़के का नाम अंग्रेजी के बी अक्षर से शुरु होता है तो ये लोग रिश्तों को बड़ा महत्व देते है। जानते है न जातकों के बाकी गुण..
स्वभाव-जिन लोगों के नाम का पहला इंग्लिश अक्षर डी है, वे हर काम को पूरे विश्वास के साथ करते हैं और अंतिम क्षण तक सफलता पाने का प्रयास करते हैं। साथ ही, इन लोगों का खुद पर नियंत्रण भी अच्छा रहता है। किसी भी परिस्थिति में खुद को आसानी से बदल लेते हैं।
इन बातों के कारण जीवन में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करते हैं और मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। इनका दिमाग रचनात्मक होता है और इनके पास योग्यता भी होती है कि अपने आइडियाज को कैसे लागू करेंगे।
करियर- जिन जातकों का नाम डीअक्षर से शुरू होता है वह कुशल प्रशासक, मेधावी, विद्वान एवं अच्छे मार्गदर्शक होते हैं। अपने परिणाम एवं वाणी के बल पर अपने काम निकलवा लेते हैं।काम को धीरे और लग्न के साथ करते है। अपने कार्य़ के क्षेत्र मे सबसे ज्यादा मेहनत करते है पर मेहनत के अनुसार परिणाम नही मिल पाते और षड्यंत्र का शिकार हो जाते है। इनकी लग्न और मेहनत इन्हे सफल तो बनाती पर है सफलता ज्यादा दिन तक नही टिक पाती।
प्यार-अपने अच्छे नेचर की वजह से ये सबके प्रिय होते है, जितना चाहते है उससे अधिक  प्यार पाते है पर जिन्हे खुद प्यार करते है उन्हे पाने के लिये कड़ी तपस्या करनी पड़ती है। रिश्ता दिल से निभाते हैं। और जरुरत से ज्यादा प्यार सामने वाले पर न्यौछावर कर देते है।
गुण-1.ऐसे जातक नपातुला बोलते हैं और जो बोलते हैं वह उत्साह दिलाने वाला होता है। यह अपने लक्ष्य के प्रति वफादार होते हैं तथा उसे पाने के लिए किसी भी प्रकार की बाधा या परिस्थिति से नहीं घबराते। ऐसे जातकों को अपने मान सम्मान की बड़ी फिक्र होती है और यदि कोई इनका अपमान कर दे तो यह तिलमिला उठते हैं।
2.ऐसे व्यक्ति कम बोलने वाले, मिष्ठभाषी होते हैं। अपने विचारों पर अडिंग बने रहते हैं। प्रबल आत्मविश्वासी वचन के पक्के, जिम्मेदार व्यक्ति होते हैं। मान प्रतिष्ठा को बहुत महत्त्व देते हैं। अगर मानप्रतिष्ठा प्राण देकर भी बनी रह सके तो ये चूकते नहीं।
3.ऐसे जातक अत्यधिक मिलनसार होते हैं तथा आत्मविश्वास इनमें कूट-कूट कर भरा होता है। पर जरुरत पड़ने पर आत्मविश्वास को खो देते । ऐसे लोग किसी भी बात पर सहज विश्वास नहीं करते तथा न ही किसी के अंधे भक्त होते हैं। ये कहने को तो सब की हाँमेंहाँ मिलाते हैं, परन्तु करते वही हैं जो इनका दिल चाहता है।
3.ये अपने मानसम्मान को ठेस न पहुँचे, इसका पूरा ध्यान रखते हैं। ये अपने विपरीत के सहयोग से आगे बढ़ते हैं। इनकी खास बात ये है कि ये साफ और नेक दिल होके है छल और कपट से कोसों दुर रहते है। इनका यही गुण कई बार इन्हे घातक चोट पहुंचाता है।

किसी भी नाम का कोई न कोई अर्थ जरुर होता है और इन्ही नामो से उस व्यक्ति के व्यक्तित्व का पता भी चलता है। यही वजह है कि मांबाप अपने बच्चे का नाम काफी सोच-समझकर रखते है।
Raashi Ke Tips